1.राष्ट्रपति चुनाव 17 जुलाई को
• चुनाव आयोग ने अगले राष्ट्रपति के लिए चुनाव 17 जुलाई को कराने का ऐलान किया है। मतों की गिनती 20 जुलाई को होगी। इसके लिए अधिसूचना 14 जून को जारी कर दी जाएगी।
• राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है। इससे पहले चुनाव की प्रक्रिया पूरी की जानी है। उप राष्ट्रपति पद के चुनाव की तारीख की घोषणा बाद में होगी।
• मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने बुधवार को राष्ट्रपति चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा करते हुए कहा कि मतदान 17 जुलाई को संसद भवन, राज्यों की विधानसभाओं तथा दिल्ली और पुडुचेरि विधानसभाओं में होगा। मतदान सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक होगा।
• मतों की गिनती 20 जुलाई को 11 बजे सुबह से होगी। लोकसभा के महासचिव अनूप मिश्रा राष्ट्रपति चुनाव में निर्वाचन अधिकारी होंगे जबकि राज्यों में विधानसभा के वरिष्ठ अधिकारी सहायक निर्वाचन अधिकारी होंगे। चुनाव के लिए अधिसूचना 14 जून को जारी की जाएगी।
• नामांकन दायर करने की अंतिम तिथि 28 जून होगी। नामांकन पत्रों की जांच 29 जून को की जाएगी और एक जुलाई तक नाम वापस लिये जा सकेंगे। जैदी ने निर्वाचन नियमों के हवाले से बताया कि संविधान के अनुच्छेद 55 के तहत राष्ट्रपति पद का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से एकल संक्र मणीय मत द्वारा किया जाएगा।
• इस चुनाव के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 50 प्रस्तावकों और 50 अनुमोदकों के हस्ताक्षर युक्त नामांकन पत्र जमा करने होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी प्रस्तावक या अनुमोदक किसी एक उम्मीदवार के नामांकन पत्र पर ही हस्ताक्षर कर सकेगा।
2. ब्याज दरों को लेकर सरकार और आरबीआइ आमने-सामने
• ब्याज दरों को लेकर सरकार और रिजर्व बैंक (आरबीआइ) पूरी तरफ खुलकर आमने-सामने आ गए हैं। वार्षिक मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुए आरबीआइ गवर्नर उर्जित पटेल ने बुधवार को वैधानिक रेपो रेट को स्थिर रख कर साफ कर दिया कि वह ब्याज दरों में कटौती का अपनी तरफ से समर्थन नहीं करेंगे।
• यही नहीं, समीक्षा के बाद प्रेस कांफ्रेंस में पटेल ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) को सरकार के नियंत्रण से पूरी तरह से आजाद बताते हुए यहां तक कह दिया कि समिति के सदस्यों ने वित्त मंत्रलय के लोगों से मिलने से भी इन्कार कर दिया।
• इसके बाद जो हुआ, वह सरकार व आरबीआइ के बीच बहुत कम बार हुआ है। शाम को वित्त मंत्रलय में प्रमुख आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रrाण्यम ने मीडिया के सामने नाराजगी भरा बयान दिया।
• अरविंद ने सबसे पहले महंगाई की दर के आकलन को लेकर आरबीआइ के मौजूदा तौर-तरीके पर ही सवाल उठाए। उन्होंने अर्थव्यवस्था की दशा को लेकर केंद्रीय बैंक के तरीके को भी अंतिम मानने से इन्कार किया।
• आरबीआइ की तरफ से महंगाई की दर का लक्ष्य चार फीसद (दो फीसद ऊपर या नीचे) रखा गया है। सीईए ने कहा कि यह अभी काफी नीचे है। महंगाई दर में बड़ी वृद्धि के आसार नहीं है।
• अर्थव्यवस्था में मांग की कमी है। आर्थिक विकास दर के बहुत ज्यादा बढ़ने के भी आसार नहीं है। इन तर्को के आधार पर सुब्रrाण्यम ने कहा, ‘ऐसे में मौद्रिक नीति को नरम बनाने (ब्याज दरों में कटौती) का जैसा अभी माहौल है, वैसा कभी कभार ही होता है।’
• मौद्रिक नीति पेश होने से दो दिन पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद जताई थी। लेकिन एमपीसी में शामिल छह सदस्यों में से पांच ने वैधानिक दरों को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रखने का समर्थन किया। साफ है कि एमपीसी में सरकार की तरफ से नामित प्रतिनिधि भी दरों में कटौती के पक्ष में नहीं हैं।
• आरबीआइ गवर्नर ने संवाददाता सम्मेलन में एमपीसी की स्वायत्ता को बहुत अहम बताया। कहा कि एमपीसी के दल ने समीक्षा से पहले वित्त मंत्रलय के अफसरों से मिलने के आग्रह को ठुकराया है। एमपीसी में आरबीआइ गवर्नर के अलावा दो डिप्टी गवर्नर तथा सरकार की तरफ से नामित तीन और प्रतिनिधि होते हैं। आरबीआइ और वित्त मंत्रलय के बीच पहले भी ब्याज दरों को लेकर तनाव का माहौल रहा है।
• वर्ष 2012 में जब आरबीआइ गवर्नर डी सुब्बाराव ने जब ब्याज दरों में कटौती की मांग खारिज कर दी थी, तब तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने गुस्से में कहा था कि अगर अर्थव्यवस्था को संभालना उनका ही काम है तो यही सही, वह अकेले ही यह काम करेंगे। लेकिन मौजूदा गर्वनर उर्जित पटेल को प्रधानमंत्री मोदी का विश्वस्त माना जाता है। खास तौर पर जिस तरह से पूर्व आरबीआइ गवर्नर रघुराम राजन की जगह पर पटेल को नियुक्त किया गया, उससे यह माना गया कि ब्याज दरों और अन्य आर्थिक मुद्दों पर केंद्र व रिजर्व बैंक के बीच अब ज्यादा बेहतर सामंजस्य रहेगा।
• वित्त मंत्रलय ने महंगाई आकलन के आरबीआइ के तरीके पर उठाए सवाल
• महंगाई दर नीचे होने और मांग में कमी से ब्याज दर घटाने का उपयुक्त माहौल : सीईए
• कहा, महंगाई
दर में ज्यादा वृद्धि के नहीं दिख रहे आसार
• अर्थव्यवस्था की दशा को लेकर केंद्रीय बैंक के तरीके को अंतिम मानने से इन्कार
• मौद्रिक नीति समिति सरकार के नियंत्रण से पूरी तरह है आजाद
• ब्याज दरों पर कटौती का अपनी तरफ से नहीं करेंगे समर्थन
• कुछ और माह करेंगे महंगाई दर के स्थिर रहने का इंतजार14ब्याज दरों में कटौती नहीं, लक्षित हस्तक्षेप होंगे आर्थिक विकास में मददगार
3. सस्ते कर्ज की टूटी आस : मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर में बदलाव नहीं : एसएलआर में की गई आधा फीसद की कटौती
• रिजर्व बैंक ने आम धारणा के मुताबिक प्रमुख नीतिगत दर में आज कोई बदलाव नहीं किया लेकिन राज्यों के बीच कृषि ऋण माफी को लेकर जारी होड़ को देखते हुए राजकोषीय स्थिति बिगड़ने को लेकर चिंता जरूर जताई।
• केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति की द्वैमासिक समीक्षा में सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) 0.5 प्रतिशत घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया। एसएलआर के तहत बैंकों को निर्धारित हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों में लगाना होता है।
• शीर्ष बैंक के इस कदम से बैंकों के पास कर्ज देने के लिए अधिक नकदी बचेगी इससे लोगों को कर्ज तो मिलेगा पर सस्ता नहीं मिलेगा। रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को भी 7.4 प्रतिशत से घटाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है।
• मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की यहां हुई पांचवीं बैठक में रेपो दर को 6.25 प्रतिशत तथा रिवर्स रेपो को 6 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया। रेपो दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक बैंकों को अल्पावधि कर्ज देता जबकि रिवर्स रेपो के अंतर्गत आरबीआई बैंकों से अतिरिक्त नकदी को लेता है।’
• केंद्रीय बैंक ने हालांकि, कृषि ऋण माफी के कारण राजकोषीय स्थिति में गिरावट आने की आशंका को लेकर चिंता जतायी। इसमें कहा गया है, ‘‘बड़े पैमाने पर कृषि ऋण माफी की घोषणाओं से राजकोषीय स्थिति बिगड़ने और फलस्वरूप मुद्रास्फीति बढ़ने का जोखिम बढ़ा है।’
• रिजर्व बैंक ने इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को भी 7.4 प्रतिशत से घटाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया।मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की यह पांचवीं बैठक थी जिसमें रेपो दर को 6.25 प्रतिशत और रिवर्स रेपो को 6 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया।
• सीमांत स्थायी सुविधा और बैंक दर 6.50 प्रतिशत पर पूर्ववत रही। एसएलआर को 20.5 से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया।
4. सेस खत्म होने से जीएसटी हुआ आसान
• बहुप्रतीक्षित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के क्रियान्वयन की राह आसान बनाने को सरकार ने बीते तीन साल में कई सेस खत्म किए हैं। जीएसटी लागू होने के बाद मुख्यत: क्षतिपूर्ति सेस और सात पुराने सेस बचेंगे। ऐसा होने पर कारोबारियों को जीएसटी के नियमों का पालन करने में आसानी रहेगी।
• वित्त मंत्रलय का कहना है कि सरकार ने बीते तीन आम बजट और कर कानून संशोधन अधिनियम 2017 के माध्यम से कई कर समाप्त किए हैं। हालांकि जो सेस जारी रहेंगे, वे सिर्फ उन्हीं वस्तुओं पर लागू हैं जो जीएसटी से बाहर रखी गयी हैं। इनमें से कई सेस आयात शुल्क से संबंधित हैं।
• जीएसटी लागू होने पर भी जो सेस जारी रहेंगे, उनमें आयातित वस्तुओं पर शिक्षा सेस, आयातित वस्तुओं पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा सेस, कच्चे तेल पर सेस, डीजल और मोटर स्प्रिट पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (रोड सेस), मोटर स्प्रिट पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, तंबाकू और तंबाकू उत्पादों तथा कच्चे तेल पर एनसीसीडी (नेशनल कैलेमिटी कंटीजेंट ड्यूटी) शामिल हैं।
• मंत्रलय का कहना है कि लगातार सेस खत्म करने से जीएसटी एक जुलाई 2017 से सुचारु ढंग से लागू करने के लिए जमीन तैयार हुई है। सरकार ने यह कदम कई चरणों में उठाया है ताकि जीएसटी के अलग-अलग स्लैब के अनुरूप विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के लिए दर तय की जा सकें।
• आम बजट 2015-16 में सरकार ने सेवाओं पर लगने वाले एजूकेशन सेस तथा माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा सेस को खत्म कर दिया था। इसी तरह वर्ष 2016-17 के आम बजट में सीमेंट स्ट्राबोर्ड पर सेस खत्म किया गया। वहीं श्रम कल्याण सेस कानून, 1976 में संशोधन के जरिये लौह अयस्क खान,मैंगनीज ओर खदानों और क्रोम खदानों पर सेस को खत्म किया गया।
• तंबाकू सेस को तंबाकू सेस कानून में संशोधन करके हटाया गया। इसी तरह सिने वर्कर वैल्फेयर सेस एक्ट 1981 में संशोधन कर सिने वर्कर वैल्फेयर एक्ट को खत्म किया गया।
• सरकार ने वर्ष 2017-18 के आम बजट में शोध और अनुसंधान सेस को खत्म किया। इसके अलावा कर कानून संशोधन अधिनियम 2017 के माध्यम से 13 प्रकार के सेस एक साथ खत्म किए गए। इनमें बीड़ी, चीनी, चाय, कृषि कल्याण जैसे सेस शामिल हैं।
• इस तरह जीएसटी लागू होने के बाद क्षतिपूर्ति सेस मुख्य सेस होगा जो डीमेरिट गुड्स पर लगाया जाएगा और इससे एकत्रित धनराशि का इस्तेमाल राज्यों को राजस्व हानि की भरपाई के लिए किया जाएगा।
5. चीन की अगुआई वाले शंघाई सहयोग संगठन का पूर्णकालिक सदस्य बनेगा भारत
• चीन की अगुआई वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में भारत एक दिन बाद यानी शुक्रवार को पूर्णकालिक सदस्य के तौर पर शामिल हो जाएगा। लेकिन भारत इस संगठन में अपनी शर्तो के साथ ही बना रहेगा। एससीओ के सदस्य देशों की शुक्रवार को कजाखिस्तान की राजधानी अस्ताना में बैठक है।
• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसमें शामिल होने के लिए गुरुवार को सुबह रवाना होंगे। भारत के साथ ही पाकिस्तान को भी इस संगठन के पूर्णकालिक सदस्य के तौर पर शामिल किया जाएगा।
• एससीओ में शामिल होने पर भारत को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इसके अधिकतर सदस्य देशों के पास ऊर्जा के बड़े भंडार हैं और बेहतर रिश्ते होने की वजह से भारत को इनमें हिस्सा मिल सकता है। लेकिन भारत के लिए इसकी अहमियत इसलिए भी है कि उसके दो अहम प्रतिद्वंद्वी देश चीन और पाकिस्तान भी इसमें होंगे। ऐसे में भारत को कूटनीतिक स्तर पर काफी सर्तक रहना होगा।
• चीन की तरफ से यह कहा गया है कि यह संगठन भारत और पाक के रिश्तों को सामान्य बनाने में मदद कर सकता है। अस्ताना में बहुत संभव है कि प्रधानमंत्री मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से द्विपक्षीय मुलाकात होगी। उनकी कुछ अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों से भी मुलाकात होगी। लेकिन वह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से भी मिलेंगे, इसके आसार कम हैं।
• सनद रहे कि वर्ष 2015 में रूस के शहर ऊफा में एससीओ में हुई मुलाकात के बाद ही दोनों देशों के रिश्तों में क्षणिक सुधार आया था।
• विदेश मंत्रलय के अधिकारियों के मुताबिक इस बार शायद ही मोदी शरीफ से मुलाकात करने की कोशिश करें। इसके पीछे एक वजह यह है कि शरीफ बेहद कमजोर हो चुके हैं। पाक सेना की पकड़ फिर मजबूत हो चुकी है। इसके अलावा अगले वर्ष उन्हें चुनाव लड़ना है।
• विदेश मंत्रलय के प्रवक्ता गोपाल बागले के मुताबिक शरीफ से मुलाकात का न तो कोई प्रस्ताव पाकिस्तान की तरफ से आया है और न ही भारत ने कोई प्रस्ताव भेजा है। एससीओ में भारत के पूर्ण कालिक सदस्य बनने के फायदे के बारे में विदेश मंत्रलय के संयुक्त सचिव जीवी श्रीनिवास का कहना है कि फायदा या घाटा बाद में देखा जाएगा लेकिन अभी यह था कि पड़ोस में एक मजबूत संगठन बन रहा है तो भारत ने उससे दूर नहीं रहने का फैसला किया है।
• 2014 में भारत को इसमें शामिल करने का फैसला किया गया जिसका इस वर्ष अनुमोदन कर दिया जाएगा। भारत चाहेगा कि सदस्य देशों के साथ आर्थिक ताल्लुक बनाए जाएं और दूसरा आतंकवाद के खिलाफ सदस्य देशों के बीच एक सामंजस्य बन सके। समूह में शामिल होने के लिए भारत ने 38 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं जिनका अनुमोदन अस्ताना बैठक में किया जाएगा।
• पिछले वर्ष एससीओ की बैठक में चीन की वन बेल्ट-वन रोड (ओबोर) नीति का समर्थन किया गया था जबकि भारत उसका विरोध करता है। यह पूछे जाने पर एससीओ में शामिल होने से भारत के रुख पर असर नहीं पड़ेगा, इस पर श्रीनिवास का जवाब था कि भारत इस बात का खयाल रखेगा कि उसके राष्ट्रीय हितों के साथ कोई समझौता नहीं हो।
6. भारत-रूस ने बनाई दुनिया की पहली हाइब्रिड एयरोबोट
• भारत व रूस ने दुनिया की पहली हाइब्रिड एयरोबोट बनाने में सफलता हासिल की है। दोनों देशों के संयुक्त उद्यम द्वारा विकसित अत्याधुनिक एयरोबोट जमीन, बर्फ और रेत के साथ पानी पर भी चलने में सक्षम है। साढ़े छह मीटर लंबी इस बोट में एक चालक के अलावा दस अन्य लोग सवार हो सकेंगे।
• सरकारी संस्था स्कोलकोवो फाउंडेशन की ओर से मॉस्को में आयोजित दो दिनी स्टार्टअप विलेज कार्यक्रम में मंगलवार को इस हाइब्रिड बोट को दुनिया के सामने पेश किया गया। भारतीय कंपनी मिलेनियम एयरोडायनामिक्स व रूस के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड एयरोस्पेस टेक्नोलॉजीज के संयुक्त उद्यम आइआइएएटी होल्डिंग ने इसे तैयार किया है।
• हाइब्रिड एयरोबोट पेट्रोल या बिजली पर चलने में सक्षम है। मॉस्को में इसका परीक्षण हो चुका है। यह दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों के अलावा बाढ़ग्रस्त और दलदली इलाकों में भी आसानी से आ-जा सकेगी।
• आइआइएएटी होल्ंिडग के बोर्ड सदस्य सुकृत शरण ने बताया, भारत सरकार व निजी संस्थानों की ओर से 25 एयरोबोट के ऑर्डर मिले हैं, जिनमें 5 मुहैया कराई जा चुकी हैं।
• आपात स्थिति में मददगार : एयरोबोट के आपात स्थितियों में मददगार होने की बात कही गई है। मौजूदा समय में बाढ़ या अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने के लिए होवरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया जाता है।
7. ब्राजील में नेतृत्व का संकट : राष्ट्रपति टेमर के खिलाफ मुकदमा शुरू
• ब्राजील की चुनावी अदालत ने घोटाले में फंसे राष्ट्रपति माइकल टेमर के खिलाफ सुनवाई शुरू कर दी है। इसके कारण राष्ट्रपति को अपना पद छोड़ना पड़ सकता है।
• लातिन अमेरिकी देश ब्राजील में एक साल में दूसरी बार नेतृत्व का संकट उत्पन्न हो रहा है।सुप्रीम इलेक्टोरल ट्रिब्यूनल (टीएसई) के निर्धारित चार सत्रों में से पहले
सत्र में यह निर्णय किया जाएगा कि 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति दिल्मा रोसेफ और उनके तब के उपराष्ट्रपति टेमर का पुनर्निर्वाचन रद्द होना चाहिए अथवा नहीं, क्योंकि इस चुनाव अभियान में भ्रष्ट तरीके से धन लगाया गया था।
• यदि सात न्यायाधीशों का पैनल चुनाव परिणाम को रद्द करने के लिए मतदान करता है तो रोसेफ पर महाभियोग के समय पिछले साल ही राष्ट्रपति का पद संभालने वाले टेमर के सामने खुद ही पद छोड़ने का जोखिम होगा।
• इसके अलावा एक अन्य भ्रष्टाचार संबंधी मामले की जांच में फंसे कंजव्रेटिव पार्टी के राष्ट्रपति का कहना है कि चुनावी अदालत उन्हें दोषमुक्त करार देगी। दोषी पाये जाने पर टेमर अपील कर सकते हैं।
8. जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करेंगी जैव विविधताएं
• जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का मुकाबला करने में कृषि जैव विविधता की अहम भूमिका होगी। देश में सदियों से जनजातियों ने जैव विविधता के संरक्षण में उल्लेखनीय कार्य किया है।
• पिछले कुछ सालों में जनजातीय किसानों ने कुल पांच हजार से अधिक देसी प्रजातियों के पंजीकरण के लिए आवेदन किया है।
• केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि उनके इस कार्य में जनजातीय क्षेत्रों में स्थापित कृषि विज्ञान केंद्रों ने जबर्दस्त काम किया है। सिंह मंगलवार को जनजातीय क्षेत्रों में खोले गए कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
• पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण ही देसी प्रजातियों का पंजीकरण करता है। इससे भविष्य में जलवायु अनुकूल प्रजाति के विकास में निर्णायक मदद मिलेगी। सिंह के साथ सम्मेलन में जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल उरांव भी मौजूद थे।
• देश में स्थापित कुल 673 कृषि विज्ञान केंद्रों में से सवा सौ केंद्र जनजातीय बाहुल क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। सिंह ने कहा कि कृषि क्षेत्र में जनजातीय लोगों के उत्थान के लिए उनके खेतों तक आधुनिक प्रौद्योगिकी पहुंचानी होगी।1आदिवासी क्षेत्रों की जैव विविधता को प्रकृति की धरोहर मानकर संरक्षित करने की जरूरत है। यहां की नैसर्गिक व जैविक खेती को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
• सिंह ने कहा कि इन क्षेत्रों में हमे मोटे अनाज, दलहन, तिलहन, फल-फूल, सब्जियों के नए बीज व अन्य प्रजातियों की खेती पर विशेष ध्यान देना होगा। यहां वर्षा आधारित खेती के पारंपरिक तौर तरीके को अपनाने के साथ नई तकनीक और जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा। जनजातीय क्षेत्रों में छोटी जोत को देखते हुए उसी के अनुरूप तकनीक अपनानी होगी, ताकि उन्हें फायदा हो सके।
• इन क्षेत्रों की फसलों की उन्नत मार्केटिंग की जरूरत पर जोर दिया जाएगा। इसे घरेलू बाजारों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेचा जा सकता है। इनकी उपज के विशेष गुण और स्वाद की मार्केटिंग पर जोर होगा, ताकि यहां के किसानों की आय बढ़ाई जा सके।
• यहां औषधीय गुण वाली फसलें तिल, मोटे अनाज, कोदो, काकुन, कुटरी व रागी जैसी दलहन और तिलहन की कई परंपरागत फसलें हैं।
• तापमान बढ़ने से कृषि क्षेत्र होगा सबसे ज्यादा प्रभावित
• चुनौती से निपटने में सफलता दिलाएंगी आदिवासी जैव विविधताएं
9. यूएन ने पानी की किल्लत पर चेताया : 2050 तक साफ पानी की मांग 40 फीसद तक बढ़ेगी
• संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि वर्ष 2050 तक साफ पानी की मांग 40 फीसद से अधिक तक बढ़ जाएगी और दुनिया की आबादी का एक चौथाई हिस्सा ऐसे देशों में रहेगा जहां साफ पानी की ‘‘दीर्घकालिक या बार-बार’ कमी होगी।
• उन्होंने सुरक्षा परिषद में बताया, सभी क्षेत्रों में पहले ही पानी की उपलब्धता को लेकर तनाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से तीन चौथाई देश अपने पड़ोसियों के साथ नदियों या झीलों को साझा करते हैं।
• गुटेरेस ने कहा, पानी, शांति और सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन के बिना विभिन्न देशों के समुदायों और वगरे के बीच विवाद और तनाव बढ़ने का जोखिम है। वर्तमान में सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता वाले देश बोलिविया के राष्ट्रपति ईवो मोरालेस ने कहा, वर्ष 1947 के बाद से अब तक देशों के बीच पानी से संबंधित करीब 37 संघर्ष हुए हैं।
• पानी सहयोग का उत्प्रेरक : गुटेरेस ने कहा, भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता तीन युद्धों के बाद भी कायम है। उन्होंने रेखांकित किया कि यह साबित हो चुका है कि जल सहयोग का उत्प्रेरक है, उन देशों के लिए भी जिनके आपस में रिश्ते अच्छे नहीं है।
• गुटेरेस ने जल संसाधनों पर सीमा-पार विवादों को रोकने और उनका हल करने के लिए कूटनीति की अहमियत पर जोर दिया। गुटेरेस ने कहा, पानी, अमन और सुरक्षा आपस में अनिवार्य रूप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पानी निश्चित तौर पर राष्ट्रों के बीच सहयोग का उत्प्रेरक है, उन देशों के लिए भी जिनके रिश्ते आपस में अच्छे नहीं हैं।
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