प्रिय पाठकों
HP Exams Adda में आपका स्वागत है।1.खाड़ी में गहरी हुई दरार : 5 अरब देशों सहित मालदीव, लीबिया ने कतर से राजनयिक रिश्ते तोड़े
• तीन खाड़ी देशों और मिस द्वारा अपने साथ रिश्ते तोड़ने के फैसले की आलोचना करते हुए सोमवार को कतर ने कहा, यह ‘‘अन्यायपूर्ण’ है और इसका उद्देश्य दोहा को ‘‘राजनीतिक संरक्षणवाद’ के तहत लाना है।
• कतर के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में सऊदी अरब, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और मिस के अप्रत्याशित कदम का संदर्भ देते हुए कहा है-यह कदम अन्यायपूर्ण हैं और झूठे तथा बेबुनियाद दावों पर आधारित हैं।
• बयान में कहा गया है इसका उद्देश्य साफ है, यह देश पर संरक्षणवाद थोपने के लिए है। यह कतर की एक देश के तौर पर संप्रभुता का उल्लंघन है।
• कतर की ओर से इस्लामी समूहों का समर्थन और ईरान के साथ रिश्तों को लेकर अरब देशों के बीच दरार और गहरी हो गई है। पांच अरब देशों के अलावा मालदीव और लीबिया की अंतरिम सरकार ने सोमवार को कतर के साथ अपने राजनयिक संबंध तोड़ लिए।
• यह क्षेत्र में हाल के वर्षो में सबसे बड़ा राजनयिक संकट है।बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, यमन, मिस, सऊदी अरब और मालदीव ने ऐलान किया है कि वह गैस समृद्ध राष्ट्र से अपने राजनयिक कर्मचारियों को वापस बुलाएंगे। कतर में साल 2022 में फीफा विश्वकप
होना है और यहीं अमेरिकी सेना का प्रमुख अड्डा है।
• वहीं लीबिया की तीन प्रतिद्वंद्वी सरकारों में से एक ने कतर के साथ राजनयिक संबंध तोड़ने की घोषणा की। लीबिया की समाचार एजेंसी लाना के अनुसार देश की अंतरिम सरकार के विदेशमंत्री मोहम्मद अल-डेरी ने कतर पर ‘‘आतंकवाद को प्रश्रय’ देने का आरोप लगाया।
• व्यापक असर पड़ेगा : संकट का न केवल कतर और उसके नागरिकों बल्कि पश्चिम एशिया एवं पश्चिमी देशों के हितों पर भी व्यापक असर पड़ सकता है। यमन में ईरान समर्थित विद्रोहियों के साथ युद्धरत सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने भी कहा कि उसने समूह से कतर को निकाल दिया है।
• गठबंधन ने कतर पर ‘‘यमन में आतंकी संगठनों की मदद करने’ का आरोप लगाया जो उसका इस तरह का पहला दावा है। सऊदी अरब ने कतर के साथ अपनी सीमा भी बंद कर दी जिससे जमीन के रास्ते कतर को खाद्य एवं अन्य आपूत्तर्ियां अवरुद्ध हो गई।
• देशों ने कतर के राजनयिकों को भी अपने क्षेत्र से बाहर जाने को कहा है। सभी राष्ट्रों ने यह भी कहा कि उनकी योजना वायु और समुद्री यातायात भी बंद करने की है।
• संकट के आर्थिक प्रभाव पहले ही दिखने लगे हैं। यूएई के एयरलाइन एमिरेट्स, एतिहाद, फ्लाईदुबई एवं एयर अरेबिया तथा सऊदी अरब की विमान सेवा सऊदी एयरलाइंस ने मंगलवार सुबह से कतर की दोनों तरफ की सभी उड़ानें निलंबित करने की घोषणा की।
• 27 मई को कतर के शासक अमीर तमीम बिन हम्माद अल थानी ने ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी को उनके पुनर्निर्वाचन पर बधाई देने के लिए उन्हें फोन किया था।
• खाड़ी देशों ने दोहा स्थित सैटेलाइट न्यूज नेटवर्क अल-जज़ीरा सहित कतर के मीडिया को ब्लॉक कर दिया था।
• लंबे समय से खटक रहा था कतर : कतर द्वारा इस्लामवादियों का समर्थन करने पर अरब पड़ोसी इसकी लंबे अरसे से आलोचना करते आए हैं। उनमें प्रमुख चिंता मुस्लिम ब्रदरहुड को लेकर है जो सुन्नी इस्लामी सियासी समूह है जिसे सऊदी अरब और यूएई ने गैरकानूनी करार दिया हुआ है क्योंकि यह इन देशों में राजशाही के लिए चुनौती है।
• अमेरिका चुप : बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना की फिफ्थ फ्लीट ने टिप्पणी के आग्रह पर तुरंत प्रतिक्रि या नहीं दी कि क्या फैसले से उसका अभियान प्रभावित होगा।
• कतर में अल उदीद वायुसेना अड्डा है जहां अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड है। यहां करीब 10,000 अमेरिकी सैनिक हैं।
• कच्चे तेल और गैस की कीमतों में हो सकती है वृद्धि, जिससे बढ़ सकती है महंगाई
• भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकता है खाड़ी में उभरा तनाव
• खाड़ी देशों में कार्यरत लाखों भारतीयों के रोजगार पर पड़ सकता है असर
• नई परिस्थितियों से कूटनीतिक तालमेल बिठाने की भी होगी चुनौती
2. दक्षिण चीन सागर और उत्तर कोरिया पर अमेरिका ने चीन को किया आगाह
• अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में निर्माण और उत्तर कोरिया पर लगाम लगाने से पीछे हटने को लेकर चीन को आगाह किया है।
• अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा है कि अपनी आर्थिक ताकत का इस्तेमाल कर चीन अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकता। ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष जूली बिशप के साथ सोमवार को वार्षिक चर्चा के बाद उन्होंने यह बात कही।1टिलरसन ने कहा कि चीन के साथ अमेरिका उपयोगी रिश्ता चाहता है। लेकिन, चीन को निश्चित तौर पर महत्वपूर्ण राजनयिक मसलों पर योगदान देना होगा।
• हम चीन को वैश्विक समस्याओं से पीछे हटने के लिए अपनी आर्थिक ताकत के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दे सकते। चाहे दक्षिण चीन सागर में उसका द्वीपों का सैन्यीकरण करना हो या उत्तर कोरिया पर समुचित दबाव बनान
े में नाकाम रहना। चीन को यह स्वीकार करना चाहिए बढ़ती आर्थिक एवं कारोबारी ताकत के साथ सुरक्षा जिम्मेदारियां भी आती हैं।
• गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रचार अभियान के दौरान लगातार चीन की आलोचना की थी। लेकिन, उत्तर कोरिया की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाने के लिए वे चीन की मदद चाहते हैं। इससे एशियाई सहयोगियों को इस बात कि चिंता है कि दक्षिण चीन सागर पर अमेरिका नरम पड़ सकता है।
• टिलरसन से पहले अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने भी पिछले हफ्ते दक्षिण चीन सागर में चीन की निर्माण गतिविधियों पर कड़ा एतराज जताया था। इस क्षेत्र में गतिविधि को लेकर पहले भी कई बार चीन और अमेरिका आमने-सामने आ चुके हैं।
3. कारोबारी सुगमता में भारत ने चीन को पछाड़ा
• कारोबार सुगमता के मामले में 30 विकासशील देशों की सूची में चीन को पीछे छोड़कर भारत शीर्ष पर पहुंच गया है।
• वर्ष 2017 के ग्लोबल रिटेल डेवलपमेंट इंडेक्स (जीआरडीआई) ने अपने 16वें संस्करण में शीर्ष 30 विकासशील देशों को वैश्विक स्तर पर खुदरा निवेश और 25 वृहद आर्थिक एवं खुदरा क्षेत्र से जुड़े मामले पर असर डालने वाले कारकों के आधार पर रैंकिंग दी गई है।
• जीआरडीआई ‘‘द एज ऑफ फोकस’ में चीन को दूसरा स्थान दिया गया है। धीमी आर्थिक वृद्धि के बावजूद बाजार के आकार और खुदरा बाजार में लगातार विकास की वजह से चीन खुदरा निवेश के लिए सबसे आकर्षक बाजार बना हुआ है।
• प्रबंधन सलाहकार कंपनी एटी कीन्रे ने कहा है कि यह अध्ययन इस दृष्टि से विशिष्ट है कि क्योंकि इसमें न केवल उन बाजारों का शामिल किया गया है जो आज आकर्षक हैं, बल्कि भविष्य में संभावनाओं वाले बाजारों को भी स्थान दिया गया है।
• इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का खुदरा बाजार सालाना 20 फीसद की दर से बढ़ रहा है। पिछले साल कुल बिक्री 1,000 अरब डालर के आंकड़े को पार कर गई है। वर्ष 2020 तक बाजार का आकार दोगुना होने की उम्मीद है।
• 30 विकासशील देशों की सूची में शीर्ष पर पहुंचा
• सूची में आकर्षक बाजारों को किया गया शामिल
• सालाना 20 फीसद की दर से बढ़ रहा है भारत का खुदरा बाजार
• पिछले साल 1,000 अरब डालर के आंकड़े को पार कर गई है कुल बिक्री
4. इकोनामी के लिए संकट बनेगी कृषि ऋण माफी
• बैंक आफ अमेरिका मेरिल लिंच की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2019 का आम चुनाव आते-आते तक माफ किए गए कृषि ऋण की कुल राशि जीडीपी के दो फीसद तक पहुंच सकती है क्योंकि अन्य राज्य भी महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों के पद चिह्नों पर चल सकते हैं।
• बोफाएमएल ने अपने शोध नोट में कहा है, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि करीब-करीब सभी राज्य उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की भाजपा सरकारों के कृषि ऋण माफी के रास्ते पर चलते हुए 2019 का आम चुनाव आने तक करीब 40 अरब डालर का कृषि ऋण माफ कर सकते हैं।’ इसमें पांच एकड़ तक की जमीन वाले किसानों का बैंक ऋण शामिल है।
• रिपोर्ट के अनुसार वित्त मंत्रालय को इसके बाजार प्रभाव को सीमित रखने के लिए ‘‘उदय’ योजना की तरह के बांड के माध्यम से कृषि ऋण का वित्तीय बोझ उठाना होगा।
• महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को पांच एकड़ तक जमीन रखने वाले किसानों का 300 अरब रपए का ऋण माफ करने की घोषणा की। यह राशि जीडीपी का 0.2 फीसद है।
• इससे पहले अप्रैल में उत्तर प्रदेश सरकार ने 360 अरब रपए का कृषि ऋण माफ किया जो कि जीडीपी की 0.3 प्रतिशत राशि है।भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश के बजाय उपभोग आधारित वृद्धि होने की संभावना है। सरकारों का मानना है कि कृषि ऋण माफी से ग्रामीण मांग में तेजी लाई जा सकती है।
• निम्न ब्याज दरें, सातवें वेतन आयोग और अच्छे मानसून से उपभोग आधारित आर्थिक वृद्धि में मदद मिलने की संभावना है।रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा के बारे में एजेंसी ने कहा है कि केन्द्रीय बैंक अपनी दो अगस्त की समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर सकता है।
• जीएसटी दरों के महंगाई बढ़ाने वाला नहीं होने की स्थिति में यह कदम उठाया जा सकता है।
• वर्ष 2019 तक 40 अरब डालर का कृषि ऋण माफ कर सकती हैं राज्य सरकारें
• यूपी और महाराष्ट्र में पहले ही माफ हो चुका है कृषि ऋण
• वित्त मंत्रालय को उठाना होगा इस कर्ज माफी का बोझ
• ‘‘उदय’ योजना की तरह इसके लिए भी जारी करने पड़ेंगे बांड
5. भारत हैवीवेट रॉकेट क्षमता वाले क्लब में
• भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार को अपनी कामयाबी का नया अध्याय लिखा। अब तक के अपने सबसे वजनी रॉकेट का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण कर इसरो ने भारत को हैवीवेट रॉकेट की क्षमता रखने वाले चुनिंदा देशों में शामिल करा दिया।
• स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन से लैस तीन चरणों वाले 43.43 मीटर ऊंचे जीएसएलवी (भूस्थैतिक उपग्रह प्रक्षेपण यान) एमके3-डी1 रॉकेट ने सोमवार शाम पांच बजकर 28 मिनट पर यहां स्थित इसरो के लांच पैड से उड़ान भरी।
• ठीक 16 मिनट बाद इस रॉकेट ने 3,136 किलोग्राम भार वाले संचार उपग्रह जीसेट-19 को अंतरिक्ष की मनमाफिक कक्षा में स्थापित कर दिया।
• जीसेट-19 भी भारत से प्रक्षेपित अब तक का सबसे वजनी सेटेलाइट है।
• करीब 200 हाथियों के बराबर वजन वाले इस रॉकेट की मदद से भारत अब 4,000 किलो तक के उपग्रहों को भूस्थैतिक कक्षा में आसानी से स्थापित कर सकता है।
• इसरो अब तक 2300 किलो से ज्यादा वजन वाले संचार उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए दूसरे देशों पर निर्भर था। इस कामयाबी के साथ भारत अब मानव अभियानों की दिशा में भी कदम बढ़ा सकता है। इसरो अध्यक्ष एएस किरण कुमार ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया।
• इसरो के वैज्ञानिकों ने भारी भरकम रॉकेट एमके3-डी1 को बोल-चाल की भाषा में ‘फैट ब्वॉय’ (मोटा लड़का) नाम दिया था। वहीं, तेलुगु मीडिया में इसे ‘बाहुबली’ नाम दिया गया।
• मील का पत्थर: डॉ. राधाकृष्णन : इसरो के पूर्व प्रमुख व सलाहकार डॉ राधाकृष्णन ने इस सफलता को मील का पत्थर करार दिया है। उन्होंने कहा, अब हम हर तरह के संचार उपग्रहों के प्रक्षेपण में आत्मनिर्भर हो जाएंगे।
• जीएसएलवी अभियान के निदेशक जी अय्यप्पन ने कहा, यह लांचिंग सामग्री, डिजाइन और प्रौद्योगिकी के मामले में भी पूरी तरह से स्वदेशी है।’
• 30 साल की मेहनत रंग लाई : जीएसएलवी एमके3-डी1 में एडवांस क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल किया गया है। इसरो ने 30 साल के अनुसंधान के बाद इसे बनाया है।
• 640 टन यानी 6 लाख 40 हजार किलो है जीएसएलवी एमके3-डी1 का वजन।
• यह 200 एशियाई हाथियों के वजन के बराबर है।
• 3136 किलो यानी 3.1 टन है जीसेट-19 का वजन।
• 10 साल है संचार सेटेलाइट की उम्र।
• इसरो ने इससे पहले 3,404 किलो का संचार उपग्रह जीसेट-18 फ्रेंच गुयाना स्थित एरियाने से प्रक्षेपित किया था।
• यह देश के संचार साधनों में नए बदलाव लाएगा।
• यह पुराने छह-सात संचार उपग्रहों की क्षमता रखता है।
6. जलवायु परिवर्तन का दिखने लगा दुखदायी असर
• जलवायु परिवर्तन से मानसूनी बारिश का ट्रेंड बदल रहा है। भारत के औसत तापमान में एक डिग्री सेंटीग्रेड से अधिक की वृद्धि हुई है। बारिश की अवधि सिमट रही है, लेकिन सालभर में होने वाली कुल बारिश की मात्र में फिलहाल कोई कमी नहीं आई है। इसके चलते भूजल रिचार्ज नहीं हो रहा है, जिसका नतीजा खतरनाक साबित होगा।
• यह जानकारी भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक केजे रमेश ने दी। उन्होंने कहा ‘बारिश के पानी को बहकर समुद्र में जाने के लिए नहीं छोड़ देना चाहिए। बूंद-बूंद को संरक्षित करना जरूरी है।’
• उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण और हवा में नमी के बढ़ते-घटते स्तर से कई तरह की मौसमी बीमारियां पैदा हो रही हैं। इसी कार्यशाला में पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने मौसम वैज्ञानिक से खुद को जोड़ते हुए कहा ‘मौसम का इस तरह बदलना खतरे से खाली नहीं है।’ लेकिन उनकी चिंता चिन्हित उन 88 औद्योगिक समूह को लेकर है, जहां पर्यावरण प्रदूषण का स्तर चिंता जनक स्तर को पार कर चुका है।
• यहां के लोगों की बिगड़ती सेहत को लेकर शासन प्रशासन का मौन और भी खतरनाक है। जयराम रमेश ने कहा कि गर्मी का मौसम जहां दिनों का होता था, वह बढ़कर दिन भी होने लगा है। पर्यावरण प्रदूषण ने इसे और गंभीर बना दिया है, जिसका सबसे ज्यादा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ा है। तपती और चिलचिलाती धूप से बच्चे और बुजुर्ग प्रभावित हो रहे हैं।
• पीएचएफआइ अध्यक्ष प्रोफेसर के. श्रीनाथ रेड्डी ने कहा कि पेरिस समझौते से अमेरिका के हाथ खींच लेने के बाद विश्व पर्यावरण के लिए अलग तरह की चुनौती पैदा हो गई है। ऐसे में इस तरह की संस्थाओं की भूमिका और बढ़ गई है। 1जाने-माने पर्यावरणविद डॉक्टर मनोरंजन होता के अनुसार, जल, वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर कुल सौ से अधिक मानक बनाए गए हैं। लेकिन उन पर अमल कराने वाली एजेंसियों का सक्रिय न होना अफसोस जनक है।
• उनका कहना है कि देश में पराली जलाने से तापमान बढ़ रहा है। इसका सबसे अधिक असर उत्तरी राज्यों पर पड़ रहा है। जाड़े के दिनों में इस क्षेत्र में हवा की गति अमूमन धीमी रहती है, जो जोखिम को और बढ़ा देती है। जबकि दक्षिण व पश्चिम के राज्यों में समुद्री हवाओं के चलने से यह समस्या पैदा नहीं होती है।
• गर्म लू से बचाव के बारे में पूछे एक सवाल के जवाब में मौसम विज्ञानी ने कहा कि इससे मरने वालों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। लेकिन कई राज्यों ने अपने यहां चेतावनी जारी करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे अधिक असर जन स्वास्थ्य पर पड़ता है।
• फाउंडेशन के प्रबंधक भार्गव कृष्ण ने कहा कि जन सहभागिता के बगैर तापमान बढ़ने की चुनौती और देश को खुले में शौच मुक्त बनाने में सफलता संभव नहीं है।
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